Holi

होली बसंत ऋतु में मनाया जाने वाला त्योहार है जो मुख्य रूप से भारत और नेपाल में मनाया जाता है, लेकिन यह भारतीय उपमहाद्वीप से प्रवासी भारतीयों के माध्यम से एशिया और पश्चिमी दुनिया के अन्य क्षेत्रों में भी फैल गया है, जिसे “त्योहार का त्योहार” भी कहा जाता है, रंग “या” प्रेम का त्योहार “।
रंगो, खुशियों, मिठाइयों, एवं पकवानों से भरी इस त्यौहार को भाईचारे के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है। इसे अच्छी फसल के लिए धन्यवाद के रूप में भी मनाया जाता है। यह एक रात और एक दिन तक चलता है, होली रंगों का त्योहार है जिसे हर साल फागुन के महीने में (मार्च) हिन्दू धर्म के लोग बड़ी धूमधाम से मनाते है। पहली शाम को होलिका दहन या छोटी होली के रूप में जाना जाता है और अगले दिन होली, रंगवाली होली, धुलेटी, धुलंडी, या फगवा के रूप में जाना जाता है।होली एक प्राचीन हिंदू धार्मिक त्योहार है जो दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में गैर-हिंदुओं के साथ-साथ एशिया के अन्य समुदायों के लोगों के लिए लोकप्रिय हो गया है।भारत और नेपाल के अलावा, त्योहार जमैका, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, मॉरीशस और जैसे देशों में भारतीय उपमहाद्वीप प्रवासी द्वारा मनाया जाता है। हाल के वर्षों में यह त्योहार यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में प्रेम, उल्लास और रंगों के वसंत उत्सव के रूप में फैल गया है।

होली रंगों का एक प्रसिद्ध त्योहार है | होली मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित है। इसे श्री हरी विष्णु के भक्त प्रहलाद की विजय के रूप में मनाया जाता है | माना जाता है की उस समय एक राजा था जिसका नाम हिरण्य कश्यप था जिसका पुत्र प्रहलाद था | प्रहलाद के विष्णु भगवान की पूजा करने को लेकर “हिरण्य कश्यप” चिंतित हो गया। उसने कई बार अपने पुत्र को समझाया की वह विष्णु भगवान की नहीं अपने पिता की पूजा करे और उसको ही असली भगवान माने। मगर प्रहलाद भगवन विष्णु की पूजा करता रहता था । जब प्रहलाद ने अपनी जिद नहीं छोड़ी तो “हिरण्य कश्यप” ने प्रहलाद को मारने के कई प्रयत्न किये मगर असफल रहे। प्रहलाद को उबलती हुई तेल की कड़ाई में डाल दिया गया| मगर वो भी भगवान विष्णु की कृपया से जल बन गया| प्रहलाद के विद्यालय में राक्षश को भेजा उसे मारने के लिए मगर राक्षस भगवान विष्णु जी की कृपा से प्रहलाद को छु तक नहीं पाया | “हिरण्य कश्यप” के कहने पर प्रह्लाद की माँ ने न चाहते हुए भी अपने पुत्र को विष (जेहर) वाला दूध पीने के लिए दिया और रोने लगी| मगर पहलाद ने वो दूध भी पी लिया और भगवान विष्णु जी की कृपा से प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ | “हिरण्य कश्यप” ने प्रहलाद को रस्सी से बंधवा कर नदी में फैकना चाहा मगर पत्थर पानी पे तैरने लगा और प्रहलाद पत्थर के सहारे नदी के किनारे आ पहुंचा | अंत में आकर “हिरण्य कश्यप” ने अपनी बहन होलिका को याद किया और “हिरण्य कश्यप” के कहने पर होलिका ने प्रहलाद को अपनी गोद में लिया और अग्नी में बैठ गयी | होलिका को भगवान शिव जी की तरफ से एक चुनरी भेटं दी थी जिसकी वजह से होलिका को अग्नि कुछ भी नहीं करती| मगर भगवान की मंजूरी पर वही चूनरी प्रहलाद पर जा पड़ी और होलिका भस्म हो गयी.

उसी समय से हिन्दू धर्म के लोग इस त्योहार को मना रहे है। होली से ठीक एक दिन पहले होलिका दहन होता है जिसमें लकड़ी, घास और गाय के
गोबर से बने ढेर में इंसान अपने आप की बुराई भी इस आग में जलाता है। होलिका दहन के दौरान सभी इसके चारों ओर घूमकर अपने अच्छे स्वास्थ्य और यश
की कामना करते है साथ ही अपने सभी बुराई को इसमें भस्म करते है। इस पर्व में ऐसी मान्यता भी है कि सरसों के उबटन से शरीर पर मसाज करने
पर उसके सारे रोग और बुराई दूर हो जाती है साथ ही साल भर तक सेहत दुरुस्त रहती है। होलिका दहन के अगले दिन रंगों का त्योहार मनाया जाता है | इस दिन सभी आपस में एक दूसरे को रंग लगाते हैं और सब की शुभकामनाएं लेते हैं और सब को बधाई देते हैं।

इस त्यौहार को भाईचारे, रंगो, खुशियों, मिठाइयों, एवं पकवानों के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है। सभी लोग बैर-भाव भूलकर एक-दूसरे से परस्पर गले मिलते हैं। घरों में औरतें एक दिन पहले से ही मिठाई, गुझिया आदि बनाती हैं व अपने पास-पड़ोस में आपस में बांटती हैं। कई लोग होली की टोली बनाकर निकलते हैं उन्हें हुरियारे कहते हैं।
ब्रज की होली, मथुरा की होली, वृंदावन की होली, बरसाने की होली, काशी की होली पूरे भारत में मशहूर है।

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